भारत और चीन के रक्षा मंत्री की मुलाकात में सीमा, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा

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डोकलाम विवाद के बाद पहली बार भारत और चीन के रक्षा मंत्री की खास बैठक गुरुवार को हुई जिसमें दोनों देशो में सैन्य सहयोग बढ़ाने पर सहमति दी है। बता दें कि भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और चीन के रक्षा मंत्री वेंग फेंघ के बीच गुरुवार को दो घंटे तक बैठक चली।

दोनों देशों के बीच डोकलाम विवाद के बाद पहली बैठक थी। और सबसे खास बात यह थी की इस बैठक के लिए दोनों देशो ने पहल की थी। इस बारे में रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच पूर्व  प्रस्तावित हॉटलाइन सेवा भी जल्द शुरू करने पर सहमति बनी है। साथ ही सशस्त्र बलों के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, अन्य पेशेवर बातचीत और संबंधों का विस्तार करने का फैसला किया गया। दोनों पक्षों ने रक्षा आदान-प्रदान और सहयोग पर 2006 में हुए समझौते की जगह एक नया द्विपक्षीय समझौता करने का भी निर्णय लिया है। बता दें कि चीन इन दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत सी नीतियों से प्रभावित है इसी का परिणाम है कि चीन द्विपक्षीय समझौते के लिए राजी हुआ था।

इस मुलाकात के दौरान रक्षा मंत्री सीतारमण ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है उन्होंने कहा कि यह रास्ता पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है। यह भारत की संप्रभुता का हनन है। इसके अलावा सीमा पार आतंकवाद के कारण भारत की चुनौतियों, अफगानिस्तान में शांति-स्थिरता, दक्षिण चीन सागर में परिवहन जैसे मुद्दों पर भी दोनों नेताओं की चर्चा हुई।


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